डिजिटल क्रांति: भारत ने पूरी तरह से डिजिटल ‘e-OCI’ प्रणाली लॉन्च की

गृह मंत्रालय ने आज आधिकारिक तौर पर “e-OCI” प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिससे पूरी विदेशी भारतीय नागरिकता (OCI) कार्यक्रम को पेपरलेस और डिजिटल-फर्स्ट सिस्टम में बदल दिया गया है। नागरिकता (संशोधन) नियम 2026 के तहत, अब भौतिक ओसीआई पुस्तिकाओं की आवश्यकता वैकल्पिक होगी और आवेदकों को इसके बजाय इलेक्ट्रॉनिक क्रेडेंशियल प्राप्त होंगे जिन्हें मोबाइल वॉलेट में संग्रहीत किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य एक नए स्वचालित बैक-ऑफिस वर्कफ़्लो का उपयोग करके प्रसंस्करण समय को वर्तमान 60 दिनों के औसत से घटाकर केवल 15 दिन करना है। इस रोलआउट में शामिल एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव नाबालिगों के लिए “एक-पासपोर्ट” नियम है, जो बच्चों को एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट रखने से रोकता है, जिससे एक लंबे समय से चली आ रही कानूनी खामी दूर हो जाएगी। सरकार ने ई-ओसीआई प्रणाली को “फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन – ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम” के साथ भी एकीकृत किया है, जिससे कार्डधारकों को साल के अंत तक 13 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्वचालित ई-गेट का उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि डिजिटल बदलाव की टीसीएस जैसी टेक दिग्गज कंपनियों ने सराहना की है, लेकिन कुछ विदेशी केंद्रों ने संक्रमण के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों की सूचना दी है। शुल्क संरचना को भी अद्यतन किया गया है, जिसमें अब नए आवेदनों की लागत ₹22,500 निर्धारित की गई है। यह सुधार भारत की व्यापक “डिजिटल इंडिया” पहल में एक बड़ा कदम है, जो लाखों वैश्विक भारतीय प्रवासियों के लिए आव्रजन को सरल बनाता है।

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