अंतरिक्ष और विज्ञान: भारत और फ्रांस ने प्रौद्योगिकी में रणनीतिक सहयोग बढ़ाया
भारत और फ्रांस ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। इस सप्ताह आयोजित उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान, दोनों देशों के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उपग्रह संचार में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। यह साझेदारी भारत के आगामी चंद्र और मंगल मिशनों को उन्नत फ्रांसीसी नेविगेशनल सेंसर के साथ सशक्त बनाने के लिए तैयार है। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के संयुक्त विकास पर भी चर्चा की। यह सहयोग समुद्री सुरक्षा और शीर्ष अनुसंधान संस्थानों के बीच प्रतिभाओं के आदान-प्रदान तक विस्तृत है। केंद्रीय मंत्रियों ने रेखांकित किया कि यह तालमेल हाई-टेक क्षेत्र में भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक मुख्य स्तंभ है। फ्रांस, यूरोपीय संघ में भारत के सबसे भरोसेमंद भागीदारों में से एक रहा है, विशेष रूप से रक्षा और एयरोस्पेस में। नए समझौतों में गहरे समुद्र की खोज परियोजनाओं के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को फ्रांसीसी केंद्रों में प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी शामिल है। अंतरिक्ष प्रक्षेपणों में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी चर्चा का एक प्रमुख विषय रही। दोनों देशों का लक्ष्य एआई अनुसंधान और नैतिक तकनीक शासन के लिए एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। यह कूटनीतिक उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं विश्वसनीय भागीदारों की तलाश में हैं। जारी संयुक्त बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और तकनीकी प्रगति के साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
