ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिए पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल से पांच देशों की अपनी महत्वपूर्ण विदेश यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जिसका पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (UAE) होगा। वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यूएई में पीएम मोदी राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) पर महत्वपूर्ण समझौतों की उम्मीद है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 11% कच्चा तेल यूएई से आयात करता है, इसलिए यह साझेदारी आर्थिक स्थिरता के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे, जहां वह भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। इन यूरोपीय देशों के साथ चर्चा का मुख्य केंद्र ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी होगा। नॉर्वे की यह यात्रा 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है, जो आर्कटिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाती है। इसके अलावा, स्वीडन में पीएम मोदी यूरोपीय उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे ताकि भारत में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। जानकारों का मानना है कि इस दौरे से एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति में आ रही बाधाएं दूर होंगी। साथ ही, यूएई में रहने वाले 40 लाख से अधिक भारतीयों के कल्याण पर भी विशेष चर्चा होगी। अंततः, यह दौरा बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को वैश्विक पटल पर मजबूती से पेश करेगा।

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