नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की अहम बैठक, वैश्विक शासन सुधार पर चर्चा
आज से नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है, जिसकी मेजबानी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन में रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जबकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की उपस्थिति पर विशेष ध्यान है। बैठक का मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार और सहयोग के लिए निर्माण” रखा गया है, जो वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है। सम्मेलन के दौरान बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर और मुखर बनाने पर विस्तृत चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘सेवा तीर्थ’ में इन विदेशी मेहमानों के साथ एक संयुक्त बैठक करेंगे, जो भारत की ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ नीति को दर्शाता है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी व्यस्तता के कारण इस बार शेरपा प्रतिनिधिमंडल को भेजा है, फिर भी सीमा पार व्यापार और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे ब्रिक्स देशों के बीच कूटनीतिक तालमेल और भी जरूरी हो गया है। जयशंकर ने शुरुआती सत्र में जोर दिया कि वैश्विक शांति के लिए पारंपरिक सहयोग को आधुनिक चुनौतियों के अनुसार ढालना होगा। सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने के रोडमैप पर भी विचार किया जा रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से राजधानी दिल्ली में चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं और भारत मंडपम के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है। उम्मीद है कि कल सम्मेलन के समापन पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया जाएगा, जो खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर एक साझा दृष्टिकोण प्रदान करेगा। यह आयोजन 2026 के अंत में होने वाले पूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की नींव रखेगा।
