विमान ईंधन की कीमतों में उछाल: एयर इंडिया ने रद्द कीं कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें

बढ़ते विमान ईंधन (Jet Fuel) की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण एयर इंडिया ने अपनी कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। एयरलाइन ने घोषणा की है कि जून से अगस्त 2026 तक वह अपनी अंतरराष्ट्रीय परिचालन क्षमता में लगभग 27% की कटौती करेगी। जिन मार्गों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है उनमें दिल्ली-शिकागो, मुंबई-न्यूयॉर्क, दिल्ली-शंघाई और चेन्नई-सिंगापुर जैसे व्यस्त सेक्टर शामिल हैं। विमानन कंपनी के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतें वैश्विक स्तर पर $160 प्रति बैरल को पार कर गई हैं, जिससे इन लंबी दूरी की उड़ानों का संचालन आर्थिक रूप से नुकसानदेह हो गया है। इसके अतिरिक्त, कुछ क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र के बंद होने से उड़ानों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत और बढ़ गई है। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कहा कि यह निर्णय एयरलाइन की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य था। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए एयरलाइन पूर्ण रिफंड या वैकल्पिक उड़ानों के विकल्प प्रदान कर रही है। हालांकि, इस कटौती से गर्मियों की छुट्टियों के दौरान टिकट की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू उड़ानों पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े। एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही ईंधन की कीमतें स्थिर होंगी, इन सेवाओं को पुनः बहाल किया जाएगा। तब तक कंपनी अपनी घरेलू सेवाओं और बेड़े के आधुनिकीकरण पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी। यह विकास वैश्विक ऊर्जा संकट के भारतीय आम नागरिकों और व्यापारिक यात्राओं पर सीधे प्रभाव को उजागर करता है।

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