भारत और यूएई के बीच $5 बिलियन का निवेश समझौता और ऊर्जा सुरक्षा संधि

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अपनी संक्षिप्त लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ सात ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में यूएई द्वारा भारत में $5 बिलियन के नए निवेश की प्रतिबद्धता और सामरिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर एक व्यापक ऊर्जा सुरक्षा संधि शामिल है। यह निवेश मुख्य रूप से भारत के बुनियादी ढांचे, रक्षा उत्पादन और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने गुजरात के वाडीनार में एक ‘शिप रिपेयरिंग क्लस्टर’ स्थापित करने पर भी सहमति जताई है, जो भारत की समुद्री क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा। ऊर्जा क्षेत्र में, दोनों नेताओं ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में सहयोग बढ़ाने और एलपीजी आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए नए ढांचे तैयार करने पर चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्ग का समर्थन करता है। इस यात्रा के दौरान सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करने और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के एकीकरण जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यूएई पहले ही भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और यह नए समझौते इस आर्थिक साझेदारी को एक “गुणात्मक उन्नयन” प्रदान करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया, जहाँ भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। यह दौरा भारत की “पश्चिम की ओर देखो” नीति की सफलता का एक और प्रमाण है, जहाँ यूएई अब भारत के सबसे विश्वसनीय रणनीतिक और ऊर्जा भागीदारों में से एक बनकर उभरा है। 2026 तक भारत में कुल डच और अमीराती निवेश के नए कीर्तिमान स्थापित होने की संभावना है।

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