वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, हफ्ते में दूसरी बढ़ोतरी
उपभोक्ताओं को एक और बड़ा वित्तीय झटका देते हुए, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज देश भर में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह संशोधन एक ही सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी ईंधन मूल्य वृद्धि है, जो पिछले शुक्रवार को लागू की गई 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी के ठीक बाद आई है। तेल कंपनियों द्वारा आज किए गए इस बदलाव के बाद, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। अन्य महानगरीय शहरों में इसका वित्तीय प्रभाव और भी अधिक देखा जा रहा है; मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.08 रुपये पर पहुंच गया है, जबकि कोलकाता में मेट्रो शहरों में सबसे अधिक पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों ने पुष्टि की है कि ये लगातार हो रही मूल्य वृद्धियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में आई भारी तेजी का सीधा नतीजा हैं। वैश्विक तेल बाजारों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जिससे समुद्री व्यापारिक मार्ग भी खतरे में पड़ गए हैं। चूंकि भारत अपनी घरेलू तेल आवश्यकताओं के 85% से अधिक को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक कच्चे तेल के बेंचमार्क में कोई भी तेज उतार-चढ़ाव सीधे स्थानीय ईंधन पंपों पर दिखाई देता है। देश भर के यात्रियों और परिवहन यूनियनों ने इस दोहरी बढ़ोतरी पर गहरी निराशा और चिंता व्यक्त की है, और कहा है कि बढ़ी हुई लागत से दैनिक जीवन का खर्च तुरंत बढ़ जाएगा। दिल्ली, बेंगलुरु और जम्मू जैसे शहरों में सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं और ऑटो-रिक्शा चालकों ने आवाज उठाई है कि उनके पास इस वित्तीय बोझ को झेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। व्यक्तिगत यात्रा के अलावा, डीजल की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने के कारण व्यापक अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। ट्रक संघों ने संकेत दिया है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो परिवहन किराया बढ़ाना पड़ेगा, जिससे अनिवार्य रूप से सब्जियों, दूध और अन्य दैनिक वस्तुओं की खुदरा कीमतें बढ़ेंगी। केंद्र सरकार पर अब विपक्ष और उपभोक्ता मंचों की ओर से केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम करने का भारी दबाव है ताकि आम नागरिकों को इस वैश्विक तेल झटके से बचाया जा सके।
