आईएमडी ने जारी किया भीषण लू का अलर्ट; दक्षिण-पश्चिम मानसून समय से पहले केरल की ओर बढ़ा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक महत्वपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अत्यधिक भीषण लू (Heatwave) चलने की गंभीर चेतावनी दी है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और बिजली ग्रिडों पर भारी दबाव बढ़ गया है। इसके साथ ही, हाल ही में उत्तर प्रदेश में आए भीषण धूल भरे तूफान ने करीब 100 लोगों की जान ले ली, जिसने इस साल के प्री-मानसून मौसम के बेहद खतरनाक और उतार-चढ़ाव वाले रूप को उजागर किया है। इस गहराते जलवायु संकट के बीच, मौसम विभाग (IMD) ने घोषणा की है कि वह आधुनिक समय की आर्द्रता और उमस की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए लू की घोषणा करने के अपने ऐतिहासिक पैमानों में बदलाव करेगा। हालांकि, इस झुलसा देने वाली गर्मी के बीच मौसम वैज्ञानिकों ने देश को एक बड़ी राहत की खबर देते हुए बताया है कि जीवनदायिनी दक्षिण-पश्चिम मानसून समय से पहले तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने पुष्टि की है कि मानसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र के कुछ हिस्सों और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है। वर्तमान वायुमंडलीय मॉडलों के अनुसार, इस बात की पूरी संभावना है कि मानसून लगभग 26 मई को केरल के तट पर अपनी पहली दस्तक दे देगा। देश का विशाल कृषि क्षेत्र, जो अपनी फसलों के लिए पूरी तरह से मौसमी बारिश पर निर्भर है, मानसून के इस शुरुआती आगमन की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। दक्षिण में बारिश की उम्मीदों के बावजूद, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को अभी कुछ और दिनों तक इस तपती और दमनकारी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय सरकारों ने स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें नागरिकों को दोपहर के समय घरों के अंदर रहने और पीने के पानी का संचय करने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) के अस्पतालों में इस भीषण गर्मी से प्रभावित होने वाले मरीजों के इलाज के लिए विशेष ‘हीट-स्ट्रोक क्लीनिक’ बनाए गए हैं। एक तरफ रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी और दूसरी तरफ समय से पहले आगे बढ़ता मानसून, उपमहाद्वीप पर जलवायु परिवर्तन के गहरे होते प्रभाव को साफ दर्शाते हैं। हालांकि आईएमडी के पूर्वानुमान के नए पैमाने अब स्थानीय स्तर पर अधिक सटीक मौसम डेटा प्रदान करेंगे, लेकिन तत्काल राहत पूरी तरह प्रकृति के रुख पर निर्भर है। जैसे-जैसे यह हफ्ता आगे बढ़ रहा है, करोड़ों भारतीय इस समय रिकॉर्ड तोड़ तापमान से बचने और मानसून की पहली फुहारों के स्वागत के बीच झूल रहे हैं।
