क्वाड कूटनीति की हलचल और अमेरिका-चीन के बीच उभरते समीकरणों से भारत की चुनौतियां बढ़ीं

भारत इस समय बहुपक्षीय ‘क्वाड’ (Quad) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने की तैयारियों में जुटा है, जिसके तहत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं। अपनी इस उच्च-स्तरीय यात्रा के दौरान रुबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे, जहां उनका मुख्य ध्यान द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा कूटनीति, तकनीकी हस्तांतरण और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर होगा। क्वाड गठबंधन, जिसमें भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, इस समय भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को चीन से अलग करने पर काम कर रहा है। यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में हुए अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन ने दुनिया भर में एक नए “G-2” वैश्विक आदेश (अमेरिका और चीन के प्रभुत्व) की चर्चा तेज कर दी है। भारत के रणनीतिक गलियारों में इस शिखर सम्मेलन का बहुत बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है, क्योंकि अमेरिका और चीन की यह द्विपक्षीय निकटता एक बहुध्रुवीय एशिया के भारत के सपने को सीधी चुनौती देती है। घरेलू कूटनीतिज्ञों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि यदि वाशिंगटन बीजिंग के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक समझौतों को प्राथमिकता देता है, तो क्वाड संगठन का महत्व काफी कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में भारत को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी सीमा गतिरोध और उसके आक्रामक रुख का सामना पूरी तरह से अकेले ही करना पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को चीन के साथ अपने संबंधों को अमेरिकी विदेश नीति के चश्मे से देखना बंद करना होगा और बीजिंग के साथ सीधे संवाद के रास्ते खुले रखने होंगे। साथ ही, भारत अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिसके तहत हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें रूस और ईरान के प्रतिनिधि शामिल हुए। पश्चिमी देशों के साथ उच्च-तकनीकी रक्षा साझेदारी बनाए रखने और दूसरी तरफ यूरेशियाई देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बचाने के प्रयास में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की परीक्षा हो रही है। इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्ये (Strait of Hormuz) जारी वैश्विक नौवहन संकट के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग की मांग को वैश्विक मंचों पर पुरजोर तरीके से उठाया है। कुल मिलाकर, मार्को रुबियो का यह आगामी भारत दौरा नई दिल्ली के लिए खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में एक अपरिहार्य और मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने का बेहतरीन अवसर है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच नई दिल्ली यह साफ संदेश दे रही है कि वह महाशक्तियों के इस खेल में मूकदर्शक बनकर रहने वाली नहीं है।

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