तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार का ऐतिहासिक दौर शुरू, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कैबिनेट में शामिल किए 23 नए मंत्री

तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में आज एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव देखा गया जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का विस्तार करके उसमें कुल तेईस नए मंत्रियों को शामिल किया गया। चेन्नई के प्रतिष्ठित लोक भवन में आयोजित एक भव्य और उच्च-स्तरीय शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने इन नवनिर्वाचित विधायकों को पद और गोपनीयता की गंभीर शपथ दिलाई। इस प्रशासनिक विस्तार को राज्य की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही तमिलनाडु में पहली बार एक औपचारिक और कार्यात्मक गठबंधन सरकार के युग की शुरुआत हो गई है। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो वरिष्ठ विधायकों ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है, जिससे कांग्रेस पार्टी की उनसठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद तमिलनाडु की सत्ता के गलियारों में ऐतिहासिक वापसी हुई है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) पार्टी ने सरकार को और अधिक समावेशी बनाने के लिए विदुथलाई चिरुथाईगल कड़गम (वीसीटी) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) जैसे अन्य क्षेत्रीय दलों को भी कैबिनेट में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है। इस बड़े फेरबदल के दौरान विभागों के आवंटन में टीवीके के वरिष्ठ नेताओं को वित्त, योजना, गृह और औद्योगिक विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं नीतिगत मंत्रालयों की बड़ी जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय का यह समावेशी कदम आगामी राजनीतिक और चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक बेहद मजबूत, व्यापक और धर्मनिरपेक्ष गठबंधन बनाने का एक सोचा-समझा प्रयास है। इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए राजभवन के बाहर हजारों की संख्या में विभिन्न गठबंधन दलों के कार्यकर्ता और समर्थक जुटे, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के बीच ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। हालांकि, इस नवगठित गठबंधन सरकार पर अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता साबित करने का तत्काल दबाव भी है, क्योंकि उन्हें अपने संयुक्त घोषणापत्र में जनता से किए गए जनकल्याणकारी वादों और औद्योगिक विकास परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारना होगा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस कैबिनेट विस्तार पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया है और इसे प्रशासनिक दक्षता के बजाय केवल राजनीतिक तुष्टिकरण और समझौतों पर टिकी हुई एक कमज़ोर सरकार करार दिया है। इसके बावजूद, राज्य में दशकों से चली आ रही दो-पक्षीय द्रविड़ राजनीति के एकाधिकार को तोड़कर विभिन्न विचारधाराओं को एक छत के नीचे लाना तमिलनाडु की राजनीति का एक नया मील का पत्थर बन गया है।

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