उच्च स्तरीय कूटनीति: नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के इतर अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक पश्चिम एशिया शांति समझौते की उम्मीद
नई दिल्ली: भारत की राजधानी से सीधे उभर रहे एक ऐतिहासिक भू-राजनीतिक घटनाक्रम में, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए एक बहुप्रतीक्षित समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण राजनयिक सफलता नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आई, जहाँ वैश्विक दूत क्षेत्रीय और समुद्री स्थिरता पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली की बैठकों के इतर संवाददाताओं को बताया कि एक व्यापक प्रस्ताव—जिसमें रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना शामिल है—अब “बड़े पैमाने पर बातचीत” के चरण में है, जिसने वैश्विक स्तर पर गहरी उत्सुकता पैदा कर दी है। यह घटनाक्रम भारत को इस दशक की सबसे महत्वपूर्ण विदेश नीति उपलब्धियों में से एक के लिए एक महत्वपूर्ण भौगोलिक मंच के रूप में स्थापित करता है। इस संभावित समाधान पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की भी पैनी नजर है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई थी और ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया था। राजनयिक सूत्रों का सुझाव है कि भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ भारत के संतुलित रणनीतिक संबंधों का लाभ उठाते हुए इस द्विपक्षीय बातचीत को सुगम बनाने में मदद की है। भारत के लिए यह शांति समझौता न केवल वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए, बल्कि उसके अपने घरेलू आर्थिक हितों के लिए भी एक बड़ी जीत है, क्योंकि भारत मध्य पूर्व के स्थिर ऊर्जा गलियारों पर बहुत अधिक निर्भर करता है। नई दिल्ली के राजनयिक क्षेत्र में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने अपना प्रवास बढ़ा दिया है, जहाँ समझौते के अंतिम पाठ को तैयार करने के लिए चौबीसों घंटे बंद दरवाजों के पीछे बातचीत चल रही है। विदेश मंत्री रुबियो ने वार्ता की तीव्र गति को रेखांकित करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कोई अच्छी खबर मिल सकती है।” विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस ‘नई दिल्ली समझौते’ को अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा संरचना को मौलिक रूप से बदल देगा, वैश्विक विवादों को सुलझाने में एक केंद्रीय केंद्र के रूप में भारत के बढ़ते महत्व को प्रदर्शित करेगा और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए तरस रहे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तत्काल राहत प्रदान करेगा।
