अभूतपूर्व जलवायु तनाव: भीषण गर्मी के बीच दिल्ली में रिकॉर्ड की गई 14 वर्षों में मई की सबसे गर्म रात
New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) इस समय एक असाधारण ग्रीष्मकालीन संकट से जूझ रहा है, क्योंकि दिल्ली में लगभग चौदह वर्षों में मई के महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई है। यह स्थिति उत्तरी भारत में शहरी जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सफदरजंग स्थित शहर के मुख्य मौसम केंद्र ने न्यूनतम रात्रिकालीन तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो इस मौसम के सामान्य औसत से 5.7 डिग्री अधिक है। रात के समय की यह अत्यधिक गर्मी निवासियों को बिल्कुल भी राहत नहीं दे रही है। इसने 26 मई 2012 के उस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है जब समान चरम मौसम की स्थिति में न्यूनतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। यह संकट केवल शहर के केंद्र तक सीमित नहीं है; पालम, लोधी रोड, रिज और आयानगर जैसे अन्य मौसम केंद्रों पर भी न्यूनतम रात्रिकालीन तापमान 30°C से 32°C के बीच दर्ज किया गया, जिससे पूरी राजधानी में आधिकारिक तौर पर “गर्म रात” (Warm Night) की घोषणा की गई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, एक गर्म रात तब मानी जाती है जब दिन का अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा हो और रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 से 6.4 डिग्री अधिक बना रहे। रात में मौसम ठंडा न होने के कारण दिन की परेशानी और बढ़ गई है, जहाँ अधिकतम तापमान 43.5°C से लेकर 44.6°C को पार कर गया है। इसी वजह से आईएमडी को राजधानी के लिए ‘येलो अलर्ट’ और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए गंभीर ‘रेड अलर्ट’ जारी रखना पड़ा है। यह लगातार चलने वाली हीटवेव कंक्रीट के ढांचों के कारण हवा के फंसने से पैदा हुई है, जिसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव ने और बढ़ा दिया है, जहाँ सड़कें और इमारतें दिन भर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे वापस छोड़ती हैं। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल सहित कई अस्पतालों ने हीटस्ट्रोक के मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते स्वास्थ्य अधिकारियों ने तत्काल जनहित परामर्श जारी किए हैं। इस चरम मौसम ने क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर भी बुरा असर डाला है, क्योंकि शाम को चलने वाली धूल भरी आंधियों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को ‘खराब’ श्रेणी में धकेल दिया है, जिससे भारी और स्थिर हवा में प्रदूषक तत्व फंस गए हैं।
