सीबीएसई परीक्षा मूल्यांकन में गड़बड़ी के बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, चेयरमैन और सचिव का हुआ तबादला
भारत के शिक्षा मंत्रालय ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर तत्काल प्रभाव से एक बड़ा फेरबदल कर दिया है। बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन में आई गंभीर परिचालन विफलताओं और तकनीकी गड़बड़ियों के बाद सीबीएसई के चेयरमैन और बोर्ड सचिव दोनों को उनके पदों से हटा दिया गया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई हाल ही में कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लागू की गई ऑनलाइन ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के टेंडर और कार्यान्वयन को लेकर खड़े हुए बड़े विवाद के बाद की गई है। एक केंद्रीय पैनल की जांच रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि बोर्ड ने अपने ही आंतरिक ड्राई-रन (परीक्षण) की चेतावनियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था, जिसमें इस सिस्टम में गंभीर तकनीकी कमियों की बात कही गई थी और इसे एक साल के लिए टालने की सिफारिश की गई थी। इन तकनीकी चेतावनियों को दरकिनार कर जब इस सिस्टम को देश भर में लागू किया गया, तो इसके कारण हजारों छात्रों के परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी देखने को मिली। यह विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया जब झारखंड के एक 17 वर्षीय छात्र ने हिम्मत दिखाते हुए सीबीएसई की इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का दावा किया और इस मुद्दे को संसदीय समिति के सामने उठाया। इस गंभीर मामले को लेकर वरिष्ठ सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को एक विशेष बैठक बुलाई थी। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने इस विवाद की तह तक जाने के लिए और ओएसएम अनुबंध की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति का भी गठन कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस प्रशासनिक और तकनीकी विफलता को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है और इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। अब सीबीएसई के नए आने वाले नेतृत्व के सामने देश की इस सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने और छात्रों के आक्रोश को शांत करने की एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।
