उत्तर और मध्य भारत में मानसून की वापसी, शुरुआती सुस्ती के बाद भारी बारिश से नदियां उफान पर
उत्तर, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे लंबे समय से बने शुष्क दौर के बाद कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों में हुई अत्यधिक बारिश के चलते कई जगह जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। हालांकि, इस ताजा बारिश के दौर के बावजूद, अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव और शुरुआती दौर की असमान मानसूनी चाल के कारण देश भर में कुल मौसमी वर्षा का आंकड़ा सामान्य दीर्घकालिक औसत (LPA) से काफी पीछे बना हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जहां हालिया बारिश से खरीफ फसलों की बुआई को थोड़ी राहत जरूर मिली है, वहीं प्रमुख नदी घाटियों और जलाशयों के जलस्तर को सामान्य करने के लिए आगामी महीनों में भी निरंतर व्यापक बारिश की आवश्यकता होगी। असम और पूर्वोत्तर राज्यों के मैदानी इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राहत शिविर तैनात करने पड़े हैं। राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में भी अचानक हुई भारी बारिश के बाद नागरिक एजेंसियों ने अर्बन फ्लड मिटिगेशन प्लान के तहत जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में पंपिंग स्टेशन चालू कर दिए हैं। जल संसाधन प्रबंधन बोर्डों का कहना है कि जब तक प्रमुख बांधों में पूर्ण भंडारण नहीं हो जाता, तब तक राज्यों को जल आवंटन के लिए एहतियाती दिशा-निर्देशों का पालन करना जारी रखना होगा।
