सरकारी ई-कॉमर्स निर्यात नीति से ग्रामीण निर्माताओं को बढ़ावा
भारत के लघु और मध्यम उद्योगों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को गति देने के लिए, केंद्र सरकार ने अपने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में बदलाव करते हुए विदेशी पूंजी वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्यात-उन्मुख इन्वेंट्री मॉडल संचालित करने की अनुमति दी है। इस नई व्यवस्था के तहत, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को विशेष निर्यात केंद्र स्थापित करने की अनुमति मिली है, जिनका मुख्य उद्देश्य देश भर के स्थानीय निर्माताओं द्वारा तैयार सामान का संग्रहण, भंडारण और विदेशी बाजारों में प्रेषण करना है। यह नीति विशेष रूप से गैर-महानगरीय शहरों और ग्रामीण जिलों के छोटे कारीगरों, कपड़ा बुनकरों और सूक्ष्म-निर्माताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो अब तक अत्यधिक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत, जटिल सीमा-पार लॉजिस्टिक्स और वैश्विक वितरण तंत्र के अभाव के कारण विदेशी बाजारों में प्रवेश नहीं कर पाते थे। इस नई व्यवस्था के जरिए मुरादाबाद के पीतल उद्योग या भदोही के कालीन क्लस्टरों जैसे क्षेत्रीय केंद्रों के उद्यमी जटिल कागजी प्रक्रियाओं में उलझे बिना सीधे विदेशी उपभोक्ताओं तक अपना सामान पहुंचा सकेंगे। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला ‘डिस्ट्रिक्ट्स एज़ एक्सपोर्ट हब्स’ पहल और हालिया सीमा शुल्क आधुनिकीकरण का ही अगला चरण है, जिससे सूक्ष्म-निर्माताओं के लिए निर्यात की लागत और समय में भारी कमी आएगी। नीति-निर्माताओं का अनुमान है कि इन्वेंट्री-आधारित निर्यात चैनलों को खोलने से भारत का समग्र निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र विविधतापूर्ण बनेगा और प्रमुख औद्योगिक गलियारों से इतर क्षेत्रीय विनिर्माण केंद्रों से विदेशी मुद्रा राजस्व में वृद्धि होगी।
