सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संवैधानिक रूप से सुरक्षित
देश में विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत नागरिकों को अपनी मांगों और असहमति को शांतिपूर्वक व्यक्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है, जो भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, हालांकि इसके साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस बल द्वारा संयम बरतने की हिदायत दी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग न करने की बात कही, जबकि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने, मानवाधिकारों को सुरक्षित रखने और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
